मोदी सरकार वक्फ सम्पत्तियों का शैक्षिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सदुपयोग कर रही है : मुख्तार अब्बास नकवी

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नई दिल्ली,। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने गुरुवार को कहा कि केंद्र की मोदी सरकार देशभर में वक्फ सम्पत्तियों का समाज के शैक्षिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सदुपयोग करने के अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रही है।
यहां गुरुवार को वक्फ सम्पत्तियों के सम्बन्ध में नए दिशानिर्देशों के लिए जस्टिस(सेवानिवृत) ज़कीउल्लाह खान के नेतृत्व में गठित 5 सदस्यीय कमेटी द्वारा नकवी को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
इस अवसर पर नकवी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने देशभर में वक्फ सम्पत्तियों पर स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, कौशल विकास केंद्र, बहु-उदेशीय सामुदायिक केंद्र ‘सद्भाव मंडप’, ‘हुनर हब’, अस्पताल, व्यावसायिक केंद्र आदि का निर्माण कराया है।
नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों के लिए देश के सिर्फ 100 जिलों तक सीमित विकास योजनाओं का विस्तार ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के अंतर्गत 308 जिलों में कर दिया है। आजादी के बाद पहली बार देश के 308 जिलों में अल्पसंख्यक तबकों और विशेषकर लड़कियों की शिक्षा हेतु मूलभूत सुविधाओं के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। पिछले लगभग साढ़े चार वर्षों के दौरान इस योजना के तहत 16 डिग्री कॉलेज, 2080 स्कूल भवन, 37744 अतिरिक्त क्लास रूम, 1207 हॉस्टल, 176 आईटीआई, 48 पॉलिटेक्निक, 39501 आंगनबाड़ी केंद्र, 3,48,624 घऱ, 386 सदभावना मंडप, 79 आवासीय स्कूल, 508 मार्केट शेड, 17397 पेयजल सुविधाओं का मोदी सरकार द्वारा अल्पसंख्यक क्षेत्रों में निर्माण कराया गया है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ में देश के 308 जिले, 870 ब्लॉक, 331 शहर, हजारों गांव कवर किए गए हैं। इससे वक्फ सम्पत्तियों का इस्तेमाल समाज की तरक्की के लिए किए जाने में कामयाबी मिली है। देशभर में लगभग 5.76 लाख रजिस्टर्ड वक्फ संपत्तियां हैं।
नकवी ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशें वक्फ संपत्तियों के सदुपयोग एवं दशकों से विवाद में फंसी सम्पत्तियों को विवाद से बाहर निकालने के लिए वक्फ नियमों को सरल एवं प्रभावी बनाएगी। केंद्र सरकार इस कमेटी की सिफारिशों का अध्ययन कर आवश्यक कदम उठाएगी।
नकवी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों का समाज की भलाई विशेषकर लड़कियों की शिक्षा के लिए सदुपयोग करने वाले ‘मुतवल्लियों’ को केंद्र सरकार पुरस्कृत कर रही है। साथ ही सेंट्रल वक्फ कौंसिल, वक्फ रिकॉर्ड के डिजिटलाइजेशन हेतु राज्य वक्फ बोर्डों को आर्थिक मदद दे रही है ताकि सभी राज्य वक्फ बोर्ड, वक्फ सम्पत्तियों के डिजिटलाइजेशन का काम तय समय सीमा में पूरा कर सकें। इस क्रम में 90 प्रतिशत वक्फ सम्पत्तियों का डिजिटाइजेशन पूरा हो गया है और बाकि सम्पत्तियां भी जल्द ही डिजिटाइज़ हो जाएगी।
नकवी ने कहा कि वक्फ संपत्तियों की शिकायतों और विवादों के निपटारे हेतु केंद्र स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय ‘बोर्ड ऑफ़ एडजूडिकेशन’ का गठन किया गया है। इसी तरह सभी राज्यों में 3 सदस्यीय न्यायाधिकरण की स्थापना की जा रही है। लगभग 23 राज्यों में इनका गठन किया जा चुका है।

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में युवा संसद हेतु प्रतिभागियों हुई स्क्रीनिंग

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झांसी, । भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित जनपद स्तरीय युवा संसदों के आयोजन की श्रंखला में गुरुवार को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आगामी 24 जनवरी को आयोजित होने वाली जनपद स्तरीय युवा संसद हेतु प्रतिभागियों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें विद्याथियों ने भारत सरकार के कार्यक्रमों एवं योजनाओं पर पक्ष-विपक्ष में अपने विचार रखे। जनपद स्तरीय युवा संसद की स्क्रीनिंग के प्रथम दिन बुविवि परिसर, बुन्देलखण्ड महाविद्यालय, महारानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स डिग्री कॉलेज के 40 स्वयंसेवकों ने नामांकन कराया।
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मुन्ना तिवारी ने कहा कि युवा संसद भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से सरकार ने युवाओं को अवसर प्रदान किया है कि वे देश के नवनिर्माण में अपने विचारों एवं सुझावों के माध्यम से योगदान दें। इस अवसर पर उन्होंने स्क्रीनिंग के मापदण्डों के विषय में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया।
प्रतिभागिता करते हुए स्वयंसेवकों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत अभियान, भ्रष्टाचार, पर्यावरण जैसे विषयों को अपने उद्बोधन में समाहित करते हुए पक्ष-विपक्ष में अपने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन युवा संसद के नोडल अधिकारी डॉ. मुहम्मद नईम ने किया। निर्णायक मण्डल के रुप में डॉ. गजाला रिजवी व डॉ. सीपी पैन्युली रहे। इस अवसर पर डॉ. अंजू दत्ता, डॉ. पुनीत बिसारिया, डॉ. अचला पाण्डेय, डॉ. श्रीहरि पाण्डेय, डॉ.अमरेश सिंह, सतीश साहनी, संजय सतोईया, मयंक कुमार आदि उपस्थित रहे।

संघ लोक सेवा आयोग में आयु सीमा को लेकर आया बड़ा फैसला

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नई दिल्ली, 25 दिसम्बर। संघ लोक सेवा आयोग में आयु सीमा में कटौती मसले पर केन्द्र सरकार का कहना है कि आयु मानदंड को लेकर सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया है। सरकार का कहना है कि ऐसी रिपोर्ट और अटकलों पर विराम लगाया जाना चाहिए। नीति आयोग ने केद्र सरकार को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने वाले सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा को घटाकर 27 वर्ष करने का सुझाव दिया था।
यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन(यूपीएससी) में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की उम्र घटाने के मसले पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ) राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा है कि सिविल सेवा की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए पात्रता के आयु मानदंड में बदलाव के लिए सरकार द्वारा कोई कदम नहीं उठाया है। रिपोर्ट और अटकलों पर विराम लगाया जाना चाहिए।
इस समय सिविल सेवा परीक्षा में न्यूनतम आयु सीमा 21 और अधिकतम 32 वर्ष है। इससे पूर्व बासवन कमेटी भी आयु सीमा में कटौती की संस्तुति कर चुकी है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट(सीसैट) लागू कर इसके प्रारूप में व्यापक बदलाव किया गया था। केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद यूपीएससी प्रतियोगी छात्रों ने 2014 में राजधानी दिल्ली सहित अन्य शहरों में इसके खिलाफ जमकर आंदोलन किया था।
नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि वर्ष 2022-23 तक धीरे-धीरे सिविल सर्विसेज में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु घटाकर 27 साल कर दी जाए। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया था कि सिविल सर्विसेज के लिए केवल एक ही एग्जाम लिया जाए।